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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए भारतीय हवाई हमले को लेकर एक बेहद रोमांचक जानकारी सार्वजनिक हुई है। इस हवाई हमले में भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया था और इस ऑपरेशन का कोडनेम था- ऑपरेशन बंदर।

सेना का मानना है कि इस ऑपरेशन 'बंदर' का नाम हमारे पौराणिक कथाओं के एतिहासिक महत्व पर आधारित है। रामायण की एतिहासिक लड़ाई में बंदरों का स्थान महत्वपूर्ण था, जिसके आधार पर भगवान राम की बानर फौज ने लंका नष्ट की थी।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस साल फरवरी में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर बेहद गोपनीय तरीके से एयर स्ट्राइक की गई थी। इस ऑपरेशन की गोपनीयता को बनाए रखने के लिए भारतीय वायुसेना ने इसका कोडनेम ऑपरेशन बंदर दिया था।

भारतीय वायुसेना भी लंका को नष्ट किये जाने की तर्ज पर अपने मिशन को अंजाम देने निकली और दुश्मनों के लगभग 80 फीसदी ठिकाने नष्ट कर दिए। सेना द्वारा यह एक सफल ऑपरेशन रहा, जिसमें 15 मिराज 2000 बालाकोट पर बम बरसाकर लौटे। यह हवाई हमला इसी साल 26 फरवरी को किया गया था।

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ऑपरेशन बंदर इतना गोपनीय रखा गया था कि पाकिस्तान को उस समय तक इसकी भनक नहीं लगी, जब तक की भारतीय वायुसेना के मिराज विमान अपने मिशन को अंजाम देकर भारतीय क्षेत्र में वापस नहीं लौट आए।

इसके अगले दिन 27 फरवरी को पाकिस्तानी वायुसेना के जहाजों ने भारतीय सीमा में घुसकर सैन्य अड्डों को निशाना बनाने का नाकाम प्रयास किया। भारतीय वायु सेना ने दुश्मन का मुंहतोड़ जवाब देते हुए उन्हें खदेड़ लिया। इस दौरान पाकिस्तान के विमान को मार गिराया गया। हालांकि, इसी बीच भारतीय वायुसेना का भी एक लड़ाकू विमान पाकिस्तानी सीमा में दुर्घटना का शिकार हो गया। इस विमान पर विंग कमांडर अभिनंदन सवार थे। पाकिस्तानी सेना ने गैरकानूनी तरीके से तीन दिन तक अभिनंदन को अपनी कैद में रखा।

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आखिरकार भारत की कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान ने एक मार्च को विंग कमांडर अभिनंदन को अटारी-वाघा बॉर्डर पर भारत के सुपुर्द कर दिया था। दुश्मन देश के दांत खट्टे कर उनकी कैद से वापस आने पर विंग कमांडर अभिनंदन का पूरे देश में युद्ध हीरो की तरह स्वागत हुआ था।

गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए बालाकोट एयरस्ट्राइक का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि भारत ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक और फिर पुलवामा आतंकी हमले के बाद एयर स्ट्राइक करके अपने इरादे और क्षमता का परिचय दिया है। साथ ही राष्ट्रपति ने यह कहा था कि भविष्य में भी देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएंगे।

बता दें 14 फरवरी को पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। जिसके बाद भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश के ठिकाने पर हवाई हमला किया था।

इससे पहले भी वायुसेना ने एक रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान उस समय हाईअलर्ट पर था, लेकिन बावाजूद इसके बालाकोट एयरस्ट्राइक को पूरा किया गया। इस ऑपरेशन को पूरा करने के लिए 6 हजार लोगों ने काम किया।

ये बात "द लेसन लर्न्ट" फ्रॉम द ऑपरेशन नामक रिपोर्ट में कही गई है। इसमें ये भी कहा है कि छह में से पांच लक्ष्यों पर निशाना साधा गया था। इस रिपोर्ट में ऑपरेशन के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं का विस्तृत मूल्यांकन किया गया है। ताकि भविष्य में अगर कोई ऑपरेशन का संचालन किया जाए, तो इससे मदद मिल सके। इस हमले के बाद काफी चर्चा और बहस भी हुईं।