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Twitter/DK Shivakumar

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक में कांग्रेस के संकटमोचक नेता माने जाने वाले डी के शिवकुमार को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। ईडी ने धनशोधन मामले में पिछले कुछ दिनों में उनसे बार-बार पूछताछ की थी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कनकपुरा के विधायक शिवकुमार पूछताछ के लिए चौथी बार मंगलवार को यहां ईडी मुख्यालय पेश हुए।

अधिकारियों ने बताया कि लंबी पूछताछ के बाद उन्हें धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

शिवकुमार की गिरफ्तारी के ठीक बाद उनके ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा गया कि उनके खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित है। इसमें उन्हें गिरफ्तार कराने के मिशन में सफलता मिलने पर 'भाजपा मित्रों' पर निशाना साधा गया। ट्वीट में कहा गया, ''मैं पार्टी कार्यकर्ताओं,समर्थकों और शुभचिंतकों से हताश नहीं होने की अपील करता हूं क्योंकि मैंने कुछ भी गैर कानूनी नहीं किया है। मुझे ईश्वर पर और हमारे देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और मुझे विश्वास है कि मैं इस प्रतिशोध की राजनीति से कानूनन और राजनीतिक रूप से विजेता बन कर निकलूंगा।''

इसमे कहा गया है, ''मुझे गिरफ्तार कराने के मिशन में आखिरकार सफलता हासिल करने के लिए मैं भाजपा मित्रों को बधाई देता हूं। मेरे खिलाफ आईटी(आयकर) और ईडी के मामले राजनीति से प्रेरित हैं और मैं भाजपा की बदले की और प्रतिशोध की राजनीति का शिकार हुआ हूं।''

शिवकुमार के समर्थक ईडी कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो गए और नारेबाजी करने लगे। उन्होंने गिरफ्तारी के बाद उन्हें प्रक्रियागत चिकित्सा जांच के लिए ले जाने वाले जांच अधिकारियों को भी रोका। अधिकारियों के अनुसार शिवकुमार को ईडी बुधवार को यहां अदालत में पेश करेगी और उनकी हिरासत की मांग करेगी।

ईडी ने शिवकुमार, नयी दिल्ली में कर्नाटक भवन में कर्मचारी हनुमनथैया और अन्य के खिलाफ पिछले साल धनशोधन का मामला दर्ज किया था। हालांकि शिवकुमार ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया था और कहा था कि 2017 में राज्यसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के एक रिजार्ट में गुजरात कांग्रेस के विधायकों को सुरक्षित रूप से ठहराने में अहम भूमिका निभाने के लिए आयकर तलाशी ली गयी और बाद में ईडी ने कार्रवाई की। ऐसा आरोप था कि उस चुनाव के दौरान भाजपा इन विधायकों पर डोरे डाल रही थी।

सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने जब 2017 में गुजरात से राज्यसभा चुनाव लड़ा था तब शिवकुमार ने गुजरात कांग्रेस के 44 विधायकों को एकसाथ रखने के लिए उन्हें एक रिजार्ट में ठहराया था। तीस (30) अगस्त को पहली बार ईडी के सामने पेश होते हुए शिवकुमार ने कहा था, ''(पेश होना) मेरा कर्तव्य है... मुझे कानून का सम्मान करना है। हम निर्वाचित प्रतिनिधि हैं और कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं। उसने (ईडी ने) मुझे बुलाया है... मुझे नहीं पता कि उसने मुझे धनशोधन रोकथाम कानून के तहत क्यों बुलाया है।''

उन्होंने कहा था, ''लेकिन मैं देखता हूं , उनकी सुनता हूं। मैं उसका सामना करने को तैयार हूं।'' कर्नाटक के कांग्रेस नेताओं ने शिवकुमार पर कार्रवाई को बदले की राजनीति करार दिया। भाजपा नेताओं ने इस आरोप का खंडन किया। प्रदेश कांग्रस अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने भाजपा पर प्रतिशोध की भावना से विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि पूरी पार्टी शिवकुमार के साथ खड़ी है।

ईडी ने आयकर विभाग के आरोपपत्र के आधार पर शिवकुमार एवं अन्य के खिलाफ पीएमएलए मामला दर्ज किया था।

हजारों करोड़ की संपत्ति के मालिक डीके शिवकुमार जहां 'चुनावी प्रबंधन के चाणक्‍य' हैं, वहीं पार्टी को हर संकट से उबारने का भी माद्दा रखते हैं। वे फंड जुटाने के साथ-साथ सभाओं में भीड़ जुटाने का काम करते रहे हैं। पिछले साल नवंबर में राज्‍य में हुए 3 लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों के उपचुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया था कि डीके शिवकुमार 'चुनावी प्रबंधन के चाणक्‍य' हैं।

शिवकुमार ने विपक्ष का गढ़ समझे जाने वाली बेल्‍लारी लोकसभा सीट और रामनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस को जीत दिलाई थी और पार्टी में अपनी जगह मजबूत कर ली थी। खासकर बेल्लारी सीट पर यह शिवकुमार का ही कमाल था कि कांग्रेस ने 14 साल बाद यहां जीत का स्वाद चखा था।

साभार : यह लेख मूल रूप से समाचार एजेंसी पीटीआई द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया है। यह मूल लेख का हिंदी अनुवाद है।