सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीरReuters

सुप्रीम कोर्ट बुधवार, 18 दिसंबर को विवादित नागरिकता संशोधन कानून (CAA) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली लगभग 60 याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट में सर्दी की छुट्टी से पहले कामकाज का बुधवार को आखिरी दिन है और ऐसे में याचिकाकर्ताओं की कोशिश कानून पर रोक हासिल करने की होगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति बीआर गवई और सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस नेता जयराम रमेश, त्रिपुरा के प्रद्योत किशोर देब बर्मन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और असोम गण परिषद शामिल हैं।

नागरिकता संशोधन कानून के लिए सबसे पहली याचिका मुस्लिम लीग ने दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि यह कानून संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है और इसका स्पष्ट मकसद मुसलमानों के साथ भेदभाव करना है क्योंकि प्रस्तावित कानून का लाभ सिर्फ हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के सदस्यों को ही मिलेगा।

उच्चतम न्यायालय
उच्चतम न्यायालयREUTERS/Anindito Mukherjee

वहीं इस कानून के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश भर के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किये गये। इस कानून के तहत पाकिस्तन, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है।

संशोधित नागरिकता कानून पर राजनीतिक लड़ाई मंगलवार को और तेज हो गई जब विपक्षी दलों ने ''विभेदकारी'' कानून के खिलाफ राष्ट्रपति से गुहार लगाई जबकि इससे अविचलित गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ''चाहे जो हो'' तीन पड़ोसी देशों के गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता मिलेगी। नागरिकता कानून में संशोधन के खिलाफ कई विपक्षी दलों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में एकजुटता दिखाई और सरकार पर लोगों की ''आवाज दबाने'' का आरोप लगाया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन पर पलटवार किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस के ''मित्र'' झूठ फैला रहे हैं और मुस्लिमों के बीच भय पैदा कर रहे हैं। नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के बीच मोदी ने झारखंड में एक चुनावी रैली में विपक्ष को चुनौती दी कि वे घोषणा करें कि सभी पाकिस्तानियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करेंगे। मोदी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को यह चुनौती भी दी कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करके और तीन तलाक कानून को समाप्त करके दिखाएं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ''मैं शौर्य की इस धरती से कांग्रेस, उसके मित्रों को खुली चुनौती देता हूं कि अगर साहस है तो सार्वजनिक ऐलान करें कि वे सभी पाकिस्तानियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए तैयार हैं।''

विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और देश में अन्य जगहों पर हो रहे प्रदर्शनों को लेकर प्रहार किया। सोनिया गांधी ने तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों सहित 12 विपक्षी दलों के नेतृत्व में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार जनता की आवाज दबा रही है और ऐसे कानून ला रही है जो लोगों को स्वीकार्य नहीं हैं।

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राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''हम सभी 12 विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति से मिलकर उनसे पूर्वोत्तर के हालात पर हस्तक्षेप की मांग की जो अब पूरे देश में होते जा रहे हैं जिसमें यहां जामिया भी शामिल है।'' सोनिया ने कहा, ''यह बहुत गंभीर परिस्थिति है। हमें डर है कि यह और ना बढ़ जाए। हम भारत भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से निपटने के पुलिस के तरीके से क्षुब्ध हैं।'' उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी जामिया मिल्लिया इस्लामिया में महिला छात्रावासों में घुस गये और उन्होंने विद्यार्थियों की निर्मम पिटाई की।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''मुझे लगता है कि आप सब ने भाजपा सरकार को देख लिया। जब लोगों की आवाज दबाने और लोकतंत्र में जनता तथा हमें अस्वीकार्य कानूनों को लागू करने की बात आती है तो ऐसा लगता है कि मोदी सरकार के सामने कोई बाध्यता नहीं है।''

तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से कहा कि वह सरकार को कानून वापस लेने की सलाह दें। कानून के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न सहने वाले और 31 दिसम्बर 2014 तक आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं बल्कि भारतीय नागरिक माना जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार सुनिश्चित करेगी कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता हासिल हो और वे देश में सम्मान के साथ जी सकें। शाह ने नये कानून का विरोध करने वाले लोगों को चुनौती देते हुए कहा कि वे जितना चाहें कानून का विरोध कर सकते हैं। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा, ''कुछ भी हो मोदी सरकार सुनिश्चित करेगी कि इन शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता हासिल हो और वे सम्मान के साथ भारतीय नागरिक बनकर जिएं।''

गृह मंत्री अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाहDIBYANGSHU SARKAR/AFP/Getty Images

गृह मंत्री ने कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 के कारण कोई भी भारतीय अपनी नागरिकता नहीं खोएगा और यह कानून तीनों पड़ोसी देशों में अत्याचार का शिकार बने अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कानून का विरोध करने वाले छात्रों से कहा कि इसे ठीक से पढ़ें और इसके अर्थ को समझें।

उन्होंने कहा, ''मैं अपने मुस्लिम भाइयों- बहनों से कहना चाहता हूं कि आपको डरने की जरूरत नहीं है। जो लोग भारत में रह रहे हैं, उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। कोई भी भारतीय नागरिकता खोने नहीं जा रहा है। कांग्रेस लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। कानून वेबसाइट पर है। इसे पढ़िए। नरेन्द्र मोदी 'सबका साथ, सबका विकास' में विश्वास करते हैं। किसी से भी अन्याय नहीं किया जाएगा।''

साभार : यह लेख मूल रूप से समाचार एजेंसी पीटीआई द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया है. यह मूल लेख का हिंदी अनुवाद है.