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IANS

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर देश भर में हो रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच इस कानून को लेकर फैलाई जा रही 'गलतफहमी' को दूर करने का प्रयास करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 12 जनवरी को कोलकाता में कहा कि यह कानून नागरिकता देने के लिए है, न कि लेने के लिए। इस कानून को रातों-रात नहीं बल्कि सोच विचार कर बनाया गया है, लेकिन कुछ राजनी‍तिक दल इसे जानबूझकर समझना नहीं चाहते हैं।

बेलूर मठ में युवाओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, "सीएए नागरिकता प्रदान करने के लिए बनाया गया एक कानून है। यह नागरिकता नहीं छीनता है। सरकार इस कानून के माध्यम से किसी की नागरिकता वापस नहीं ले रही है बल्कि नागरिकता प्रदान कर रही है।"

पीएम कोलकाता में स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर बोल रहे थे। इस दिन को देश भर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। मोदी ने कहा कि देश के युवाओं और अन्य नागरिकों को संसद में 11 दिसंबर को पारित होने के लगभग एक महीने बाद शुक्रवार को लागू हुए सीएए के नाम पर गुमराह किया जा रहा है।

"आज किसी भी धर्म का व्यक्ति, भारत के संविधान को मानने वाला हर व्यक्ति तय प्रक्रियाओं के तहत भारत की नागरिकता ले सकता है। आप समझ चुके हैं। जो आप समझ रहे हैं न वो राजनीतिक खेल खेलने वाले समझने को तैयार नहीं हैं।"

प्रधान मंत्री ने कहा कि सीएए उन प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करता है जिन्होंने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धर्म के नाम पर उत्पीड़न का सामना किया। "'आज किसी भी धर्म का व्यक्ति, भारत के संविधान को मानने वाला हर व्यक्ति तय प्रक्रियाओं के तहत भारत की नागरिकता ले सकता है।"

उन्होंने कहा कि सरकार महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते पर चल रही है और नए नागरिकता कानून से उन प्रवासियों को सुविधा मिल रही है जो उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। पीएम ने कहा, 'स्वतंत्रता के बाद महात्मा गांधी से लेकर दिग्गज नेताओं का कहना था कि भारत को ऐसे लोगों को नागरिकता देनी चाहिए, जिनपर उनके धर्म की वजह से पाकिस्तान में अत्याचार किया जा रहा है।'

प्रधानमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश भर में इस कानून के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन कर रहा है, जिसे विशेषज्ञ मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बता रहे है।