प्रणब मुखर्जी
प्रणब मुखर्जीIANS

विवादित नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के देशभर में फैलते विरोध के बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को एक "बहुसंख्यकवादी सरकार" के खिलाफ आगाह करते हुए कहा कि चुनावों में संख्यातमक बहुमत किसी भी राजनीतिक दल को एक "स्थिर" सरकार बनाने का अधिकार देता है

ऐसे समय में जब मौजूदा सरकार पर देश को विभाजित करने का आरोप लगाया जा रहा है मुखर्जी ने पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की "सभी को साथ लेकर चलने की" काबिलियत की भी प्रशंसा की।

प्रणब मुखर्जी ने आगे कहा, "चुनावों में जबरदस्त बहुमत मिलने का मतलब है कि आप स्थिर सरकार बना सकते हैं। जबकि लोकप्रिय बहुमत न मिलने से आप बहुसंख्यकवाद की सरकार नहीं बना सकते। यही हमारे संसदीय लोकतंत्र का संदेश और खूबसूरती है।'' उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार संसद की कार्यवाही में बाधा डालना कुछ और नहीं बल्कि सदस्यों का मजाक उड़ाने जैसा है। इन सब चीजों से बचने की जरूरत है।

इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा की सीटों की संख्या को बढ़ाकर 1,000 तक करने का भी सुझाव दिया। इसके साथ ही उन्होंने राज्यसभा में भी सीटें बढ़ाए जाने की बात की। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए फिलहाल उनका निर्वाचन क्षेत्र काफी बड़ा होता है और उसे संभालना मुश्किल काम होता है।

प्रणब दा ने कहा कि आखिरी बार लोकसभा की सीटों की संख्या को 1977 में बढ़ाया गया था। तब 1971 की जनगणना के आधार पर किया गया था, जो उस वक्त 55 करोड़ ही थी। उन्होंने कहा कि देश की आबादी तब से अब तक दोगुनी से ज्यादा हो गई है। ऐसे में अब देश में सीटों के परिसीमन की काफी जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सीटों की संख्या भी बढ़ाकर 1,000 की जानी चाहिए।

वर्ष 2012 से 2017 तक राष्ट्रपति रहे मुखर्जी ने नया संसद भवन बनाए जाने के पीछे के तर्क पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मुझे बहुत हैरानी होती है कि नए संसद भवन से भारत में संसदीय व्यवस्था के कामकाज में कैसे मदद मिलेगी या सुधार होगा।' मुखर्जी ने कहा कि अगर लोकसभा की सीटें बढ़कार 1000 की जाती है तो सेंट्रल हॉल को निचला सदन बनाया जा सकता है और राज्यसभा को मौजूदा लोकसभा में स्थानांतरित किया जा सकता है।

इस मौके पर प्रणब मुखर्जी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सराहना करते हुए कहा कि वह सबको साथ लेकर चलने वाले नेता थे। उन्होंने कहा कि देश ने 1952 में पहले संसदीय चुनाव से अब तक कई दलों को बहुमत दिया है, लेकिन किसी भी पार्टी को 50 पर्सेंट से ज्यादा वोट नहीं दिए हैं।

करीब एक घंटे लंबे अपने भाषण में मुखर्जी ने पीएम नरेंद्र मोदी के एक देश, एक चुनाव के फॉर्म्युले से भी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन के जरिए ऐसा किया जा सकता है, लेकिन इस बात की आखिर क्या गारंटी है कि भविष्य में जनप्रतिनिधि सरकार पर अविश्वास नहीं जताएंगे।

(पीटीआई/भाषा के इनपुट के साथ)